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भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ - 2025

भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ

भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ
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इस पोस्ट में हम भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ के बारे आपको बताने वाले है जैसा की भारत सरकार अपने देश के नागरिको के लिए कुछ ना कुछ योजनाए चलाती है जिससे आम नागरिक को इसका फायदा मिले लेकिन बहुत सारे विधार्थियों को पता ही नहीं है की वर्तमान की कौन कौनसी योजना सरकार द्वारा चलाई गयी है इसलिए सभी के बारे में जानने के लिए आपको हमारी इस पोस्ट को पढ़ना चाहिए 

क्योकि योजनाओं के सबंध में भी बहुत बार परीक्षा में प्रश्न देखा गया है इसलिए आपको भी इन्हे एक बार अच्छे से जरूर पढ़ना चाहिए

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1 भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ

भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ

(प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना)

PM-KISAN

✤ योजना के बारे में –
– यह एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे 24 फरवरी, 2019 को भूमि धारक किसानों की वित्तीय जरुरतों को पूरा करने के लिए शुरू किया गया था।

✤ उद्देश्य –
– इस योजना का मुख्य उद्देश्य भूमि धारक किसानों की वित्तीय जरुरतों को पूरा करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मोड के माध्यम से देश भर के किसान परिवारों के बैंक खातों में प्रत्येक चार महिनों में तीन समान किश्तों के रूप में सालाना 6000 रुपए का वित्तीय लाभ प्रदान करना है।

✤ योजना के लाभार्थी –
– शुरुआत में यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक की भूमि थी लेकिन बाद में 01/06/2019 से इस योजना का दायरा सभी भूमिधारी किसानों को कवर करने के लिए बढा दिया गया।

✤ योजना का कार्यान्वयन –
– यह योजना भारत सरकार द्वारा 100% वितपोषण के साथ एक केन्द्र प्रायोजित योजना है।
– इस योजना को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किर्यान्वित किया जा रहा है।

वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना

✤ योजना के बारे में –
– यह योजना भारत सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा संचालित की जाती है। इस योजना के अन्तर्गत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 में शामिल सभी लाभार्थियों को देश के किसी भी राज्य के किसी भी जिले में अपने हिस्से का खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जाता है।

✤ योजना के लाभ –
– इस योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (NFSA) के सभी लाभार्थियों को उनके मौजूदा राशन कार्ड के माध्यम से देश में कही भी किसी भी राज्य अथवा जिले में उनके हिस्से का खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जा सकेगा। यह योजना देश के प्रवासी श्रमिकों को उनके निवास स्थान पर सस्ती दरों पर राशन की दुकानों के माध्यम से खाद्यान्न प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
– इसके तहत परिवार के सदस्यों को अपनी पसंद की उचित दर की दुकान से अपने मूल स्थान अथवा देश के अन्य हिस्सो में एक ही राशन कार्ड से खाद्यान्न प्राप्ति में मदद मिलेगी।

उड़ान योजना (उड़े देश का आम नागरिक)

✤ योजना के बारे में –
– यह योजना नागर विमानन मंत्रालय द्वारा टियर II और टियर III शहरों में उन्नत विमानन संरचना और एयर कनेक्टिविटी के साथ ‘’उड़े देश का आम नागरिक’’ की परिकल्पना के तहत आम नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 2016 को शुरू की गई थी।

✤ योजना के उद्देश्य –
– इस योजना का प्रमुख उद्देश्य छोटे शहरों में भी आम आदमी को क्षेत्रीय वायु मार्गो पर किफायती व लाभदायक हवाई यात्रा की सुविधा प्रदान करना है।

✤ योजना की विशेषताएँ एवं लाभ –
– इस योजना के अन्तर्गत मौजूदा हवाई पट्टियों और हवाई अड्डों के पुनरूद्धार के माध्यम से कम सेवा वाले देश के विभिन्न हवाई अड्डों को कनेक्टिविटी प्रदान करने की बात कही गई है।
– इसमें केन्द्र, राज्य सरकारों और हवाई अड्डा संचालकों की ओर से चयनित एयरलाइंस को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है, ताकि कम सेवा क्षेत्र वाले हवाई अड्‌डों के संचालन को प्रोत्साहित कर हवाई यात्रा को आम लोगों के लिए किफायती बनाया जा सके। इस योजना के संचालन से देश के पिछड़े और विकसित क्षेत्रों का विकास सम्भव होगा तथा देश के मध्यम वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी हवाई यात्रा की सुविधा का लाभ मिल पाएगा।

आयुष्मान भारत योजना/ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

– शुरुआत – 23 सितंबर, 2018
– मंत्रालय – स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
– भारत सरकार ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज़ (यूएचसी) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के हिस्से के रूप में ‘आयुष्मान भारत योजना’ या ‘दीर्घ आयु भारत’ एक राष्ट्रीय पहल की शुरूआत की है।
– इस पहल को एसडीजी और इसकी रेखांकित प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है, जिसमें “किसी को भी पीछे नहीं छोड़ा जाएगा”।

✤ उद्देश्य –
– यह कम वित्तीय स्थिति वाले लोगों की स्वास्थ्य देखभाल, नि:शुल्क दवा और नैदानिक सेवाओं की गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी पर केंद्रित है।

✤ पात्रता –
– इस योजना में नवीनतम सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना के आँकड़ों के आधार पर भारत के गरीब परिवारों, ग्रामीण क्षेत्रों के सुविधाहीन परिवारों और शहरी क्षेत्रों के भी कुछ तय पेशों में लगे परिवारों एवं निर्धनता रेखा/गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों (बीपीएल) को शामिल किया गया है।

✤ मुख्य तथ्य-
– आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य क्षेत्र की दो प्रमुख योजनाएँ इस प्रकार से हैं-
(1) स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्र की स्थापना
(2) राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना

✤ स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्र की स्थापना-
– इस योजना का मुख्य उद्देश्य, स्वास्थ्य सुविधा से वंचितों (गरीब) और कमजोर परिवारों के लिए व्यापक प्राथमिक देखभाल केंद्र प्रदान करना है, जो कि अत्यधिक महँगी दवाओं और जाँच का खर्च वहन नहीं कर सकते है। स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्र नि:शुल्क नैदानिक सेवाओं और आवश्यक दवाओं तक पहुँच प्रदान करेगा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस)

– इस योजना के अंतर्गत देश भर में किसी भी निजी (सूचीबद्ध) या सार्वजनिक अस्पताल में प्रत्येक गरीब परिवारों को पाँच लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया जाएगा। यह किसी भी माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधा केंद्र में लाभार्थी को नकद रहित उपचार प्रदान करता है।

– यह भारत के राज्यों के साथ सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना के कार्यान्वयन के लिए राज्यों को एक राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) स्थापित करनी होगी।

– इसका मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों के कल्याण पर ध्यान देना है, जो कि वित्तीय बाधाओं के कारण उचित देखभाल और उपचार तक पहुँचने में विफल रहते हैं। यह उम्मीद है, कि इस योजना के अंतर्गत सौ मिलियन से अधिक परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा। एनएचपीएस विश्व की सबसे बड़ी सरकार पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) में पहले से चल रही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना को भी मिला दिया गया है।

✤ एनएचपीएस की विशेषताएँ-
– राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत आने वाले हर परिवार को पाँच लाख रूपए का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा।

– राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) का खर्च (बीमा के लिए वार्षिक प्रीमियम) केंद्र और राज्य सरकारे मिल कर वहन करेंगी।

– राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को भी अपने यहाँ इस योजना को संचालित करने के लिए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी बनाने को कहा गया है। 

– इस योजना से सौ मिलियन से अधिक परिवारों को लाभ मिल सकता है (जिसमें भारत की आबादी का 40% से अधिक हिस्सा शामिल है)।

– राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) को पेपरलेस बनाने और कैशलेस भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने नीति आयोग के साथ साझेदारी की है।

अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई)

– शुरुआत – दिसम्बर, 2000
– मंत्रालय – खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
– उद्देश्य- लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अंत्योदय अन्न योजना को लागू करना गरीबी रेखा से नीचे की आबादी के निर्धनतम वर्ग के बीच भुखमरी को कम करना और खाद्यान्न की कमी को पूरा करना था।

✤ मुख्य तथ्य-
– अंत्योदय अन्न योजना में राज्य के भीतर लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अधीन कवर किए गए गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों में से एक करोड़ निर्धनतम परिवारों की पहचान करने और उन्हें 2 रुपए प्रति किलोग्राम गेहूँ और 3 रुपए प्रति किलोग्राम चावल की राजसहायता प्राप्त दरों पर खाद्यान्न प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए यह अपेक्षित है कि वे डीलरों और खुदरा विक्रेताओं के मार्जिन सहित वितरण लागत और ढुलाई लागत वहन करें। इस प्रकार, इस स्कीम के अधीन सम्पूर्ण खाद्य राजसहायता उपभोक्ताओं तक पहुँचाई जा रही है।
– निर्गम का मानदंड जो प्रारंभ में 25 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह था, उसे 1 अप्रैल, 2002 से बढ़ाकर 35 किलोग्राम प्रति परिवार प्रति माह कर दिया गया है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013

– शुरुआत – 10 सितंबर, 2013
– मंत्रालय – खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
– उद्देश्य – एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्‍यों पर अच्‍छी गुणवत्‍ता के खाद्यान्‍न की पर्याप्‍त मात्रा उपलब्‍ध कराते हुए उन्‍हें मानव जीवन-चक्र दृष्‍टिकोण में खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है।

✤ मुख्य तथ्य-
– सरकार ने संसद द्वारा पारित, राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम,2013 दिनांक 10 सितम्‍बर,2013 को अधिसूचित किया है
– इस अधिनियम में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत राजसहायता प्राप्‍त खाद्यान्‍न प्राप्‍त करने के लिए 75% ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी के कवरेज का प्रावधान है, इस प्रकार लगभग दो-तिहाई आबादी कवर की जाएगी।
– पात्र व्‍यक्‍ति चावल/ गेहूँ/मोटे अनाज क्रमश: 3/ 2/1 रूपए प्रति किलोग्राम के राजसहायता प्राप्‍त मूल्‍यों पर 5 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्रति व्‍यक्‍ति प्रति माह प्राप्‍त करने का हकदार है।
– मौजूदा अंत्‍योदय अन्‍न योजना परिवार, जिनमें निर्धनतम व्‍यक्‍ति शामिल हैं,35 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्रति परिवार प्रति माह प्राप्‍त करते रहेंगे।

✤ विशेष प्रावधान-
– इस अधिनियम में महिलाओं और बच्‍चों के लिए पौषणिक सहायता पर भी विशेष ध्‍यान दिया गया है। गर्भवती महिलाएँ और स्‍तनपान कराने वाली माताएँ गर्भावस्‍था के दौरान तथा बच्‍चे के जन्‍म के 6 माह बाद भोजन के अलावा कम से कम 6000 रूपए का मातृत्‍व लाभ प्राप्‍त करने की भी हकदार हैं।
– 14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चे भी निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार भोजन प्राप्‍त करने के हकदार हैं।
– हकदारी के खाद्यान्‍नों अथवा भोजन की आपूर्ति नहीं किए जाने की स्‍थिति में लाभार्थी खाद्य सुरक्षा भत्‍ता प्राप्‍त कर सकेंगे।
– पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्‍चित करने के लिए भी इस अधिनियम में अलग से प्रावधान किए गए हैं। इस अधिनियम में जिला और राज्‍य स्‍तरों पर शिकायत निपटान तंत्र के गठन का भी प्रावधान है।

समग्र शिक्षा योजना 2.0

– शुरुआत – 4 अगस्त, 2021
– मंत्रालय – शिक्षा मंत्रालय
– केंद्र प्रायोजित योजना- समग्र शिक्षा योजना 1 अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2026 तक स्कूली शिक्षा क्षेत्र के लिए एक एकीकृत योजना है
– यह योजना शिक्षा के लिए सतत विकास लक्ष्य (SDG-4) के अनुसार है और अब इसे समावेशी और न्यायसंगत, गुणवत्तापूर्ण और समग्र स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के साथ जोड़ दिया गया है।

✤ उद्देश्य –
– इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चों की एक समान और समावेशी कक्षा के माहौल के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच हो, जो उनकी विविध पृष्ठभूमि, बहुभाषी जरूरतों, विभिन्न शैक्षणिक क्षमताओं का ध्यान रखें और उन्हें सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाए।

✤ योजना के मुख्य तथ्य हैं–
(i) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) की सिफारिशों को लागू करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन करें।
(ii) बच्चों के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन में राज्यों की सहायता करना।
(iii) बचपन की देखभाल और शिक्षा पर ध्यान देना।
(iv) मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता पर जोर देना।
(v) छात्रों के बीच 21वीं सदी के कौशल प्रदान करने के लिए समग्र, एकीकृत, समावेशी और गतिविधि आधारित पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र पर जोर देना।
(vi) गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रावधान और छात्रों के सीखने के परिणामों को बढ़ाना।
(vii) स्कूली शिक्षा में सामाजिक और लैंगिक अंतर को पाटना
(viii) स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर समानता और समावेश सुनिश्चित करना।
(ix) शिक्षक प्रशिक्षण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी)/राज्य शिक्षा संस्थान और जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) का सुदृढ़ीकरण और उन्नयन।
(x) सुरक्षित वातावरण में सीखने और स्कूली शिक्षा के प्रावधानों में न्यूनतम मानकों को सुनिश्चित करना।

राष्ट्रीय पोषण मिशन

– शुरुआत – 8 मार्च, 2018
– मंत्रालय – खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय

✤ उद्देश्य
– पोषण अभियान 8 मार्च, 2018 को कुपोषण मुक्त भारत की दृष्टि से शुरू किया गया था।
– भारत सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जीवनचक्र एप्रोच अपनाकर चरणबद्ध ढंग से पोषण अभियान चलाया जा रहा है, भारत सरकार द्वारा 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में समयबद्ध तरीके से सुधार हेतु महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पोषण मिशन का गठन किया गया है राष्ट्रीय पोषण मिशन के अर्न्तगत कुपोषण को चरणबद्ध तरीके से दूर करने के लिए आगामी 3 वर्षों के लिए लक्ष्य निर्धारित किये गये है-

✤ लक्ष्य –
1. 0-6 वर्ष के बच्चों में ठिगनेपन से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2%की दर से कमी लाना।
2. 0 से 6 वर्ष के बच्चों का अल्प पोषण से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2%की दर से कमी लाना ।
3. 6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत, प्रति वर्ष 3%की दर से कमी लाना ।
4. 15 से 49 वर्ष की किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत, प्रति वर्ष 3%की दर से कमी लाना ।
5. कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।

प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)

– शुरुआत – सितम्बर, 2008
– मंत्रालय – सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय

✤ उद्देश्य-
– ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से रोज़गार के अवसर पैदा करना।
– भारत सरकार ने प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) नामक एक नए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम की शुरुआत की है, जो 31 मार्च, 2008 तक चल रही दो योजनाओं का विलय करके, अर्थात् प्रधानमंत्री रोज़गार योजना (पीएमआरवाई) और ग्रामीण रोज़गार सृजन कार्यक्रम (आरईजीपी)।
– PMEGP एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना हैं, जिसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MoMSME) द्वारा प्रशासित किया जाएगा ।
– यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर एकल नोडल एजेंसी के रूप में एमएसएमई मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक सांविधिक संगठन खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा कार्यान्वित की जाएगी।
– यह योजना राज्य केवीआईसी निदेशालयों, राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्डों (केवीआईबी) और जिला उद्योग केंद्रों (डीआईसी) और राज्य स्तर पर बैंकों के माध्यम से लागू की जाएगी।

✤ योजना के मुख्य तथ्य हैं –
(i) नए स्वरोज़गार उपक्रमों/परियोजनाओं/सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से देश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर पैदा करना।
(ii) व्यापक रूप से फैले हुए पारंपरिक कारीगरों / ग्रामीण और शहरी बेरोज़गार युवाओं को एक साथ लाना और उन्हें उनके स्थान पर यथासंभव स्वरोज़गार के अवसर प्रदान करना।
(iii) देश में पारंपरिक और भावी कारीगरों और ग्रामीण और शहरी बेरोज़गार युवाओं के एक बड़े वर्ग को निरंतर और स्थायी रोज़गार प्रदान करना, ताकि ग्रामीण युवाओं के शहरी क्षेत्रों में प्रवास को रोकने में मदद मिल सके।
(iv) कारीगरों की मजदूरी अर्जन क्षमता में वृद्धि करना और ग्रामीण और शहरी रोज़गार की वृद्धि में योगदान देना।

नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन

– नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (एनईएमएमपी) 2020 एक राष्ट्रीय मिशन दस्तावेज है जो देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और उनके निर्माण के लिए विजन और रोडमैप प्रदान करता है।

– यह योजना राष्ट्रीय ईंधन सुरक्षा को बढ़ाने, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रदान करने और भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को वैश्विक विनिर्माण नेतृत्व हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए तैयार की गई है।

फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल (FAME)

– शुरुआत – 2015
– चरण I – फेम इंडिया योजना का पहला चरण वर्ष 2015 में शुरू हुआ और 31 मार्च, 2019 तक कार्यशील रहा।
– चरण II – इस योजना का दूसरा चरण अप्रैल, 2019 में शुरू हुआ और 31 मार्च, 2022 तक ।
– मंत्रालय – भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय।

✤ योजना के मुख्य तथ्य हैं –
– फेम इंडिया योजना का पहला चरण चार फोकस क्षेत्रों के माध्यम से लागू किया गया था –
(i) डिमांड क्रिएशन
(ii) टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म
(iii) पायलट प्रोजेक्ट
(iv) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
– पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel) से चलने वाले वाहनों पर नियंत्रण करने और इलेक्ट्रिकल वाहनों (Electrical Vehicles) को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा फेम इंडिया योजना (Fame India Scheme) की शुरुआत की गयी है। इस योजना का पूरा नाम फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल है। यह राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना का एक अभिन्न अंग है।

– भारत सरकार ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने और देश में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए प्रोत्साहन बढ़ाने पर जोर दे रही है। फेम इंडिया योजना के तहत, वाहन पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगे, जो चार्जेबल बैटरी से संचालित होते हैं और इसमें शून्य उत्सर्जन शामिल होगा। इसके अलावा, सरकार चार्जिंग के लिए बुनियादी ढाँचा भी विकसित करेगी, जो इन वाहनों के लिए आवश्यक है।

भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ

राष्‍ट्रीय जल मिशन

– शुरुआत – 2011
– मंत्रालय – जल शक्ति मंत्रालय
– राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) का मुख्य उद्देश्य ”समेकित जल संसाधन विकास और प्रबंधन के माध्यम से राज्यों के भीतर और बाहर जल के संरक्षण, उसकी न्यूनतम बर्बादी और उसका अधिक समान वितरण करना” है।

✤ मिशन के पाँच चिन्हित लक्ष्य है –
1. व्यापक जल डाटाबेस को सार्वजनिक करना तथा जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन करना।
2. जल संरक्षण, संवर्धन और परिरक्षण हेतु नागरिक और राज्य कार्यवाही को बढ़ावा देना।
3. अधिक जल दोहित क्षेत्रों सहित कमजोर क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना।
4. जल उपयोग कुशलता में 20 प्रतिशत की वृद्धि करना।
5. बेसिन स्तर तथा समेकित जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देना।

✤ जल संसाधन की विशेषताएँ-
– उपलब्धता तथा मात्रा, शहरीकरण, औद्योगीकरण और वन क्षेत्र में बदलाव के तौर पर भूमि उपयोग में बदलाव द्वारा भी काफी प्रभावित हो सकती है। यह महसूस करते हुए कि जलविज्ञान चक्र को प्रभावित करने वाली अनेक प्रक्रियाएँ गतिशील स्वरूप की हैं विशेषकर जलवायु परिवर्तन के कारण प्रभाव की सही मात्रा का पता लगाना एक आसान काम नहीं है और आरंभिक स्तरों पर उपयुक्त अवधारणा बनाना तथा समय के साथ-साथ उपलब्ध होने वाले अधिकाधिक डाटा के साथ विस्तृत सिमुलेशन अध्ययन करना जरूरी है।

✤ तथापि जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन का संभावित प्रभाव निम्नलिखित रूप में हो सकता है-
– हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों और बर्फ के क्षेत्र में कमी ।
– देश के अनेक भागों में वर्षा के दिनों की संख्या में समग्र कमी के कारण सूखे की स्थिति में वृद्धि।
– वर्षा के दिनों की तीव्रता में भारी वृद्धि के कारण बाढ़ आने की घटनाओं में वृद्धि।
– बाढ़ और सूखे की घटनाओं में वृद्धि के कारण कछारी एक्विफरों में भूमि-जल की गुणवत्ता पर प्रभाव।
– वृष्टिपात और वाष्पीकरण में बदलाव के कारण भूमिगत-जल पुनर्भरण पर प्रभाव।
– समुद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण तटीय तथा द्वीपीय एक्विफरों में लवणीयता का बढ़ना।
– उपर्युक्त से यह स्पष्ट है कि जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव के संदर्भ में भारत में सर्वाधिक कमजोर क्षेत्र में शामिल हैं (क) सूखा-प्रवण क्षेत्र, (ख) बाढ़-प्रवण क्षेत्र, (ग) तटीय क्षेत्र, (घ) कम वर्षा वाले क्षेत्र, (ड.) भूमिगत-जल विकास के अति दोहित क्षेत्र, महत्त्वपूर्ण और कम-महत्त्वपूर्ण स्तर वाले क्षेत्र, (च) प्रभावित जल गुणवत्ता वाले क्षेत्र और (छ) बर्फ सिंचित नदी बेसिन।
– राष्ट्रीय जल मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए पहचाने गए कार्यकलापों को समय पर पूरा करने तथा राज्य सरकारों के साथ विभिन्न स्तरों पर अनुरोध के माध्यम से पहचानी गई नीतियों के कार्यान्वयन और आवश्यक विधान सुनिश्चित करने, दोनों के संदर्भ में दीर्घकालिक सतत प्रयास करने की परिकल्पना की गई है।

कैच द रैन अभियान

– इसे जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्री-मानसून समाप्ति की अवधि के लिए राष्ट्रीय जल मिशन के तहत् शुरू किया गया है। इसकी शुरूआत विश्व जल दिवस पर की गई।

– टैग लाइन – “कैच द रैन, वेयर इट फॉल्स, व्हेन इट फॉल्स”

✤ उद्देश्य –
– लोगों की सक्रिय भागीदारी के साथ, जलवायु परिस्थितियों एवं उप-मृदा स्तर के लिए उपयुक्त ‘रेन वाटर हार्वेस्टींग स्ट्रक्चर’ निर्मित करने हेतु राज्यों एवं समस्त हित धारकों को प्रेरित करना।

✤ गतिविधियाँ –
– बाटर हार्वेस्टिग के लिए गढ्ढे बनाना।
– छत पर रेन वाटर हार्वेस्टिग करना और चैकडैम बनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
– संचयन की भंडारण क्षमता को बढ़ाने के लिए अतिक्रमणों और टैंको की सफाई करना।
– पानी के उन चैनलों में से अवरोधों को हटाना जो जलगृहण क्षेत्रों से पानी की आपूर्ति करते हैं।
– जल को पास लाने के लिए पारंपरिक जलसंचयन संरचनाओं जैसे कि, छोटे कुएँ और गहरे बड़े कुओं की मरम्मत करेगा।

अटल भूजल योजना

– शुरुआत – दिसम्बर 2019
– मंत्रालय – जल शक्ति मंत्रालय
– अटल भूजल योजना (ATAL JAL) 6000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ स्थायी भूजल प्रबंधन की सुविधा के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इसमें से, INR 3,000 करोड़ विश्व बैंक से ऋण के रूप में और INR 3,000 करोड़ भारत सरकार (भारत सरकार) के बराबर योगदान के रूप में होंगे।
– यह योजना देश के सात राज्यों में चिन्हित जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थायी भूजल प्रबंधन के लिए सामुदायिक भागीदारी और माँग पक्ष हस्तक्षेप पर जोर देती है। इस योजना में जल जीवन मिशन के लिए बेहतर स्रोत स्थिरता, सरकार के ‘किसानों की आय को दोगुना करने’ के लक्ष्य में सकारात्मक योगदान और इष्टतम जल उपयोग की सुविधा के लिए समुदाय में व्यवहार परिवर्तन को शामिल करने की भी परिकल्पना की गई है।
– इस योजना के तहत राज्यों को सहायता अनुदान के रूप में राशि प्रदान की जाएगी। विश्व बैंक का वित्तपोषण एक नए ऋण साधन के तहत किया जाएगा, अर्थात, परिणाम के लिए कार्यक्रम (PforR), जिसमें इस योजना के तहत पूर्व-सहमति की उपलब्धि के आधार पर भाग लेने वाले राज्यों को संवितरण के लिए विश्व बैंक से भारत सरकार को धनराशि वितरित की जाएगी।
– यह योजना हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की 8353 जल संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों में संचलित की जा रही है।

– इस योजना के दो घटक हैं –
1.
 संस्थागत सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण घटक के लिए मजबूत डेटा बेस, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भाग लेने वाले राज्यों में भूजल क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी की सुविधा प्रदान करके भूजल शासन के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ताकि वे अपने संसाधनों का स्थायी प्रबंधन कर सकें।
2. केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न चल रही योजनाओं के बीच सामुदायिक भागीदारी, माँग प्रबंधन और अभिसरण पर जोर देने और भूजल व्यवस्था में परिणामी सुधार के साथ पूर्व-निर्धारित परिणामों की उपलब्धि के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन घटक।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना

– शुरुआत – 28 अगस्त 2014
– मंत्रालय – वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मत्रांलय
– प्रधानमंत्री जन-धन योजना का उद्देश्य वंचित वर्गो जैसे कमजोर वर्गो और कम आय वर्गो को विभिन्न वित्तीय सेवाएं जैसे मूल बचत बैंक खाते की उपलब्धता, आवश्यकता आधारित ऋण की उपलब्धता, विप्रेषण सुविधा, बीमा तथा पेंशन उपलब्धता सुनिश्चित करना है। किफ़ायती लागत पर व्यापक प्रसार केवल प्रौद्योगिकी के प्रभारी उपयोग से ही संभव है।

 पीएमजेडीवाई वित्तीय समावेशन संबंधी राष्ट्रीय मिशन है जिसमें देश के सभी परिवारों के व्यापक वित्तीय समावेशन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण शामिल है इस योजना में प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम एक मूल बैंकिंग खाता, वित्तीय साक्षरता, ऋण की उपलब्धता, बीमा तथा पेंशन सुविधा सहित सभी बैंकिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराने की अभिकल्पना की गयी है। इसके अलावा, लाभार्थियों को रूपे डेबिट कार्ड दिया जाएगा जिसमें दो लाख रुपए का दुर्घटना बीमा कवर शामिल है। इस योजना में सभी सरकारी (केन्द्र / राज्य / स्थानीय निकाय से प्राप्त होने वाले ) लाभों को लाभार्थियों के खातो में प्रणालीकृत किए जाने तथा केन्द्र सरकार की प्रत्यक्ष लाभांतरण (डीबीटी) योजना को आगे बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। कमजोर सम्पर्क, ऑनलाइन लेन-देन जैसे प्रौद्योगिकीय मामलों का समाधान किया जाएगा। टेलीकॉम आपरेटरों के जरिये मोबाइल बैंकिंग तथा नकद आहरण केन्द्र के रूप में उनके स्थापित केन्द्रों का इस योजना के अंतर्गत वित्तीय समावेशन हेतु प्रयोग किए जाने की योजना है। इसके अलावा, देश के युवाओं को भी इस मिशन पद्धति वाले कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रेरित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ

स्वच्छ भारत मिशन

– शुरुआत – 2 अक्तूबर, 2014
– मंत्रालय – आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय
 सार्वभौमिक स्वच्छता प्राप्त करने के लिए किए जा रहे प्रयासों में तेजी लाने के लिए और स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित करने हेतु भारत के प्रधान मंत्री ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन को आरंभ किया था।
 मिशन के तहत, भारत में सभी गाँवों, ग्राम पंचायतों, जिलों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ग्रामीण भारत में 100 मिलियन से अधिक शौचालयों का निर्माण करके 2 अक्टूबर 2019, महात्मा गाँधी की 150 वीं जयंती तक स्वयं को “खुले में शौच से मुक्त” (ओडीएफ) घोषित किया।
 यह सुनिश्चित करने के लिए कि खुले में शौच न करने की प्रथा स्थायी रहे, कोई भी वंचित न रह जाए और ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की सुविधाएँ सुलभ हों, मिशन अब अगले चरण II अर्थात् ओडीएफ-प्लस की ओर अग्रसर है।

 स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण के तहत ओडीएफ प्लस गतिविधियाँ ओडीएफ व्यवहार को सुदृढ़ करेंगी और गाँवों में ठोस एवं तरल कचरे के सुरक्षित प्रबंधन के लिए मध्यवर्तन करने पर ध्यान केंद्रित करेंगी।
 ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत बुनियादी ढाँचों जैसे कि खाद के गड्ढे, सोखने वाले गड्ढे, अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब, शोधन संयंत्र आदि का भी निर्माण किया जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के इस चरण में घरेलू शौचालय एवं सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से रोज़गार सृजन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन प्रदान करना जारी रहेगा।
 यह ग्रामीण भारत को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद करेगा तथा देश में ग्रामीणों के स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार में मदद करेगा।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

– शुरुआत – 22 जनवरी 2015
– मंत्रालय – महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय
– बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना से पूरे जीवन-काल में शिशु लिंग अनुपात में कमी को रोकने में मदद मिलती है और महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों का समाधान होता है।
 यह योजना तीन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित की जा रही है अर्थात महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन मंत्रालय।

✤ इस योजना के मुख्य घटकों में शामिल हैं –
 प्रथम चरण में PCPNDT Act (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम,1994) को लागू करना, राष्ट्रव्यापी जागरूकता और प्रचार अभियान चलाना तथा चुने गए 100 जिलों (जहाँ शिशु लिंग अनुपात कम है) में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कार्य करना।

 बुनियादी स्तर पर लोगों को प्रशिक्षण देकर, संवेदनशील और जागरूक बनाकर तथा सामुदायिक एकजुटता के माध्यम से उनकी सोच को बदलने पर जोर दिया जा रहा है।

सुकन्या समृद्धि योजना

– शुरुआत – 22 जनवरी, 2015
 सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) बेटियों के लिए केंद्र सरकार की एक छोटी बचत योजना है जिसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ स्कीम के तहत लॉन्च किया गया है. छोटी बचत स्कीम में सुकन्या (Sukanya Scheme) सबसे बेहतर ब्याज दर वाली योजना है

✤ मुख्य विशेषताएँ-
 खाते में एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 250 रू तथा अधिकतम 1,50,000 रू जमा किए जा सकते है
 खाता कन्या के नाम से उसके किसी अभिभावक द्वारा खोला जा सकेगा जिसने खाता खोलने की तारीख को 10 वर्ष की उम्र प्राप्त ना की हो।
 एक कन्या के नाम से केवल एक खाता खोला जा सकता है।
 खाता डाकघर अथवा अधिकृत बैंकों की शाखाओं में खोला जा सकता है।
 खाता धारक की उच्च शिक्षा में होने वाले खर्चों के लिए खाते से आहरण किया जा सकता है।
 कन्या की आयु 18 वर्ष होने के उपरांत उसके विवाह के लिए खाते को समय पूर्व बंद किया जा सकता है।
 खाता पूरे देश में एक डाकघर/बैंक से दूसरे डाकघर/बैंक में स्थानांतरित किया जा सकता है।
 खाता खोले जाने की तारीख से 21 वर्ष पूर्ण होने पर खाता परिपक्व हो जाता है।
 खाते में जमा राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत छूट उपलब्ध है।
 खाते में अर्जित सम्पूर्ण ब्याज आयकर अधिनियम की धारा 10 के तहत कर मुक्त है।  

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2 thoughts on “भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएँ”

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